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एक बावला सा सपना ।।

  • Jul 2, 2017
  • 1 min read

पलकों की देहरी पर बैठी उन्नींदी परियों संग आया हूँ ..... सपने तेरे रौशन करने को मैं चाँद तोड़ के लाया हूँ.....


 
 
 

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