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नग़मा जिसने शाइस्ता बढ़ाया !!

  • Jul 7, 2017
  • 1 min read

शर्वरी ने यूं पर्दा उठाया

माहताब हौले से निकल आया , कुछ ज़ुदा सा लगा हमको हर वो नग़मा जिसने शाइस्ता बढ़ाया ।।।।। दिल में जाने कसक क्या जागी है अपना साया लगे अजनबी है , देखो हमको खबर भी लगी ना अश्क़ पलकों के दर से गुज़र आया ।।।। कोई ऐसा हुआ न मुखातिब कभी हाल-ए-दिल जिससे अपना बयां हम करें , ख्वाहिशें सारी सीने में दफ़न कर मैं इश्क़-ए-असबाब संग घर से निकल आया ।।।।। शर्वरी ने यूं पर्दा उठाया माहताब हौले से निकल आया , कुछ ज़ुदा सा लगा हमको हर वो नग़मा जिसने शाइस्ता बढ़ाया ।।।।।

◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆ मुक्त ईहा 

1. शर्वरी - रात

2. माहताब - चांद

3. शाइस्ता - नम्रता

4. मूखातिब - जिससे कुछ कहा जाए

5. असबाब - सामान


 
 
 

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