मीठी यादें खारा पानी....
- Jul 19, 2017
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कई मीठी यादें बह निकलीं फिर नैनों की खारे पानी में ।।। ज़ज़्बात मेरे उलझे ही रहे खुद अपनी बुनी कहानी में ।।।। कई मीठी यादें बह निकलीं फिर नैनों की खारे पानी में ।।। चाहा था जो वो कह न सके उनसे हम इस ज़िंदगानी में ।। कई मीठी यादें बह निकलीं फिर नैनों की खारे पानी में ।।। सारे ही ख़्वाब मौन हो डूब गए रात आये थे जो निंदिया रानी में ।।। कई मीठी यादें बह निकलीं फिर नैनों की खारे पानी में ।।। लड़कपन में जो विद्रोह सा था बचपना लगता है मुझे जवानी में ।।।। @ मुक्त ईहा






















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