यक़ीन..🕊
- Aug 3, 2017
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कम शब्दों में ज़्यादा कहने की कोशिश..... छोटी सी बात... मन के जज़्बात... परिंदों सी हो चली है फ़ितरत हमारी अपने ज़ख़्मी परों पर हमें आज भी भरोसा है !
क्या हुआ ग़र शज़र मुरझाने लगा है
झूम जायेगा मिल घटाओं से आज भी भरोसा है ! ~~Śमृति @ मुक्त ईहा © https://smileplz57.wixsite.com/muktiiha Like @ https://www.facebook.com/me.smriti.tiwari/ Follow@ https://www.instagram.com/mukht_iiha/






















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