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वतन🇮🇳

  • Aug 15, 2017
  • 1 min read

ज़िंदगी है हवन तो नमन चाहिये, जीतना है समर तो लगन चाहिये। आँधियों से न यूं खौफ़ खाया करो, दीपकों के लिये भी पवन चाहिये। शब्द की बंद से ही नहीं है कसक, आंसुओं से भरे दो नयन चाहिये। सोने चाँदी की बोली लगाते सभी, कोई कहता नहीं है दुल्हन चाहिये। कोई जन्नत नहीं कोई दौलत नहीं, मुस्कुराते चमन सा वतन चाहिये। ● Śमृति @ मुक्त ईहा © https://smileplz57.wixsite.com/muktiiha Like @ https://www.facebook.com/me.smriti.tiwari/ Follow@ https://www.instagram.com/mukht_iiha/ 


 
 
 

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