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वो चाँद...🌙

  • Sep 9, 2017
  • 1 min read

आज गुमसुम सा लगा थोड़ा तन्हा अकेला सा । माहताब जल रहा था जैसे थोड़ा पनीला सा । सोचा ये भी थककर कहीं गिरकर चूर न हो जाये । ये नम रात फ़िर कहीं अमावस सी बेनूर न हो जाये । सीढियाँ लगा पहुंच गई तो बोल बोलने उससे भी । सहलाया थोड़ा थपथपाया हंसकर थोड़ा उसको भी । तन्हाइयों का शोर खिलखिला कर आगे बढ़ गया । श्वेत कपोलों वाला चाँद मुस्कुरा के फ़िर गगन पे चढ़ गया । •••••••✍✍✍ ● Śमृति @ मुक्त ईहा••••••• © https://smileplz57.wixsite.com/muktiiha Like @ https://www.facebook.com/me.smriti.tiwari/ Follow@ https://www.instagram.com/mukht_iiha/ छायाचित्र आभार🤗 - !nterne+  


 
 
 

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